Srishti Khanda Extracted Page 863

Padma Purana Sanskrit Hindi Part 1 (Chaukhamba Surbharati; extracted partial page blocks) · part-1 · Verse page-863

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Sanskrit Original

सतहत्तरवाँ अध्याय वैशंपायन उवाच प्रभवत्ययमाकाशे नित्यं द्विजवरप्रभो । कोयंकोवा प्रभावोस्य कुत्र जातो घृणीश्वर: ॥१॥ किं करोति हि कार्य वै यतो रश्मिमयो भृशम् । देवैर्मुनिवरै स्सिद्धैश्चारणैर्दैत्यराक्षसैः ॥२॥ निखिलैर्मानुषैः पूज्यः सदैव ब्राह्मणादिभिः । व्यास उवाच परमं ब्रह्मणस्तेजो ब्रह्मदेहाद्विनिस्सृतम् ॥३॥ साक्षाद्ृह्ममयं विद्धि धर्मकामार्थमोक्षदम् । मयूखैर्निर्मलैः कूटमतिचंडं सुदुःसहम् ॥४॥ दृष्ट्वा प्रदुद्वुवुलोंका: करैश्चंडैः प्रपीडिताः। ततश्च सागराः सर्वे वरनद्यो नदादयः ॥५॥ शुष्यंति जंतवस्तत्र प्रियते चातुरा जनाः । अथ शक्रादयो देवा ब्रह्माणं समुपागताः ॥६॥ इममर्थं तदा प्रोचु देवांश्च विधिरब्रवीत् । ब्रह्मोवाच आदिर्ब्ह्मतनोदेवाः सत्त्वगोजनकः प्रभुः ॥७॥ अयं रजोमयः साक्षात् सुधांशुस्तनुमध्यगः । एताभ्यां पालिता लोकास्रैलोक्ये सचराचराः ॥८॥ दिव्योपपादका देवा ये वात्रैव जरायुजाः। अंडजाः स्वेदजाश्चैव ये वात्रैवोद्भिज्जादयः ॥९॥ सूर्यस्यास्य प्रभावं तु वक्तुमेव न शक्तुमः । अनेन रक्षिता लोका जनिताः पालिता ध्रुवम्॥१०॥ अस्यैव सदृशो नास्ति सर्वेषां परिरक्षणात् । यं च दृष्ट्वाप्युषः काले पापराशिः प्रलीयते ॥९१॥ सूर्य का माहात्म्य वर्णन, सङ्क्रान्ति आदि के पर्व पर दान देने की विधि, अर्कसप्तमी ब्रत के विधान का वर्णन वैशम्पायन ने पूछा-- यह जो आकाश में उदित होता है वह कौन है ? इसका प्रभाव क्या है ? यह रश्मियों का स्वामी किससे उत्पन्न हुआ है 2॥१॥ यह कौन सा कार्य करता है जिसके कारण यह रश्मिमय है ? इसकी पूजा देवता मुनिश्वर, सिद्ध, चारण, दैत्य, राक्षस, सभी मनुष्य तथा सभी ब्रह्मर्षि ब्राह्मणों के द्वारा की जाती हैं। व्यासजी ने कहा-- यह ब्रह्म का सर्वश्रेष्ठ तेज है, यह परंबह्य के शरीर से निकला है ॥२-३॥ यह साक्षात् ब्रह्म स्वरूप है, यह धर्म, अर्थ, काम तथा मोक्ष को प्रदान करने वाला है । यह निर्मल किरणों का समूह है, यह अत्यन्त प्रचण्ड तथा दुःसह है ॥४॥ सर्वप्रथम इसके प्रचण्ड किरणों को देखकर सभी जीव भाग चले । उसी से सभी सागर श्रेष्ठ नद और नदियाँ सूख जाते थे । रोगी जीव तथा दूसरे जीव मर जाते थे । उसके बाद इन्द्र आदि देवता ब्रह्माजी के पास गये ॥५-६॥ और इस बात को ब्रह्माजी को बतलाये तो ब्रह्माजी ने कहा ब्रह्माजी ने कहा. देवताओं यह ब्रह्म के शरीर का आदि ओजमय सत्त्व है ॥७॥ ब्रहम के मध्य शरीर से निकलने वाला चन्द्रमा रजोगुणमय हैं । इन दोनों से ही त्रैलोक्य के सभी जीव पालित होते हैं ॥८॥ दिव्य उपकरण से युक्त इसमें सभी जरायुज, अण्डज, स्वेदज और उद्विज इत्यादि हैं । अर्थात् इन सबों का यही आश्रय है । सूर्य के प्रभाव को हम भी नहीं बतला सकते हैं । ये ही लोकों को उत्पन्न करने वाले, रक्षा करने वाले तथा पालन करने वाले हैं ॥९-१०॥ ये ही सबों की रक्षा करते हैं अतएव इनके सामन कोई नहीं है । इनका ही उषःकाल में दर्शन करने से पाप राशि का नाश हो जाता है ॥११॥

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