Srishti Khanda Extracted Page 845
Padma Purana Sanskrit Hindi Part 1 (Chaukhamba Surbharati; extracted partial page blocks) · part-1 · Verse page-845
Sanskrit Original
पर्शुना पृष्ठवंशाग्रे स्थित्वा तेनाहनत्पुनः । दैत्यस्य दशनद्वारे हदिस्कंधेऽथ लाघवात् ॥४३॥ सगजः सपपातोर्व्यां गतासुलोंहितं वमन् । शशंसुर्मुनयो देवास्साधुसाध्विति चाब्रुवन् ॥४४॥ महेश्वर उवाच अत्रान्येऽ ख्रैरमोघैश्च दैत्यानाजध्नुराहवे । यावत्तुसेनयोर्नैव जययुद्धं समापयेत् ॥४५॥ इति श्रीपदामहापुराणे प्रथमे सृष्टिखंडे त्रैपुरिविमर्दों नाम चतुस्सप्ततितमोऽध्यायः ॥\७७४॥ — ae पचहत्तरवो अध्याय व्यास उवाच श्रुत्वा महेश्वराद्वाक्यं देवाः शक्रपुरोगमाः । दुदरुवुदैत्यसंघांस्तान्सर्वे सर्वान्समंततः ॥१॥ आजगाम महाबाहु: कुंभो नाम महासुरः । नैऋणतो यक्षराजानं गदया चाहनद्धशम् ॥२॥ गुह्णकेशो गदापातैर्जघान भृशमुत्तमम् । ततोन्योन्यं गदायुद्धमभवद्धीषणं तयोः ॥३॥ चक्रबंधं महाबंधं पुरोवध्यनिबंधनम्। प्रचुरं भीषणं यानं स्फोटतैलाभिवास्तिकम्॥४॥ तेन कृत्वा महायुद्धमवसाने धनेश्वरः । पातयामास तं स्फोटं तस्य कुंभस्य चोरसि ॥५॥ भम्रदंष्ट्स्ततः कुंभो निपपात महीतले। स्यंदनस्थो महावीर्यो जंभो हरिहयं तदा ॥६॥ जघान शरसंघैश्च तथैवैरावणं भृशम्। वासवो भिदुरेणैव संबिभेदासुरोत्तमम् ॥७॥ डाला ४२॥। वह हाथी के पीठ पर चढकर फरसे से दैत्य के मुख पर कंधे पर तथा हदय पर शीध्रता से प्रहार किया॥४३।। वह दैत्य हाथी के साथ खून वमन करते हुए पृथिवी पर गिर पड़ा । सभी मुनिगण तथा देवता उनकी प्रशंसा करते हुए साधु-साधु कहने लगे ॥४४॥ महेश्वर ने कहा-- इस युद्ध में जिन दूसरे लोगों ने आपने अमोघ अखों से दैत्यों को मारा है उससे दोनों सेनाओं की विजय युद्ध समाप्त नहीं हुआ है ॥४५॥ इस तरह श्रीपद्मामहापुराण के प्रथम सृष्टिखण्ड के त्रैपुरिवध नामक चौहत्तरबें अध्याय का शिवप्रसाद द्विवेदी (श्रीधराचार्य) कृत हिन्दी अनुवाद सम्पूर्ण हुआ ।। ७४।। — -- देवताओं और दानवों का परस्पर युद्ध और हिरण्याक्ष वध व्यासजी ने कहा-- महेश्वर की वाणी को सुनकर इन्द्र आदि सभी देवता चारो ओर से उन दैत्यों पर टूट पड़े ॥१॥ उस समय कुंभ नामक दैत्य युद्ध करने के लिए आया । और उस दैत्य ने कुबेर पर बहुत अधिक गदा से प्रहार किया ॥२॥ कुबेर ने भी उस दैत्य कुंभ पर बहुत अधिक गदा का प्रहार किया । उसके बाद उन दोनों में भयङ्कर गदा युद्ध हुआ ॥३॥ चक्रबंध, महाबंध, पुरोवध्य, निबन्धन भीषण पान, स्फोट, तैलाभिवास्तिक, आदि प्रकार से उस दैत्य के साथ युद्ध करके अन्त में कुबेर ने स्फोट को उस कुंभ के हदय पर गिराया ॥४-५॥ उसके कारण कुम्भ के दाँत टूट गये और वह पृथिवी पर गिर पड़ा । उस समय रथ पर बैठा हुआ जम्भ नामक दैत्य इन्द को ॥६।। बाण समूह से मारा । और उसी तरह उसने ऐराबण को भी मारा । इन्द्र ने अपने वज्र से उस दैत्य को
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