Srishti Khanda Extracted Page 735

Padma Purana Sanskrit Hindi Part 1 (Chaukhamba Surbharati; extracted partial page blocks) · part-1 · Verse page-735

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Sanskrit Original

भगवानुवाच अदृश्यंत तया देवा विमातैर्हससन्निभचैः ॥६९॥ एतस्मिन्नंतरे ब्रह्मा तामुवाच पतिव्रताम् । अखिलानां च देवानां द्विजानां च गवां तथा॥७०॥ यथैव निधनं तेषां कथं ते परिरोचते। मातःक्रोधं त्यजस्वाद्य॒ सूर्यस्योदयनं प्रति॥७१॥ पतिब्रतोवाच सर्वलोकानतिक्रम्य पतिरेको गुरुर्मम । अस्य मृत्युर्मनेशशापादुदिते च विरोचने ॥७२॥ तेनैव कारणेनैष मया शप्तो दिवाकर: । न कोपान्न च मोहाच्च लोभात्कामान्न मत्सरात्॥७३॥ ब्रह्मोवाच एकस्य निधनेनैव त्रैलोक्यस्य हितं भवेत् । ततस्तेचाधिकं पुण्यं मातरेवं भविष्यति ॥७४॥ सा चोवाच विधिं तत्र देवानामग्रतः सती । पतिं त्यक्त्वा च मे सत्यं शिवं मे नानुरोचते॥७५॥ ब्रह्मोवाच उदिते च खगे सौम्ये पत्यौ ते भस्मतां गते। स्वस्थेभूते च त्रैलोक्ये करिष्यामि हितं तव॥७६॥ भस्मनः पुरुषो भाव्यः कामदेवसमप्रभः । गुणैः सर्वैयुतै भर्ता रतिवत्त्वं च सर्वदा ॥७७॥ यथा पूज्यो हरिर्देवै र्यथालक्ष्मीश्च पूजिता । तथैव दंपतीस्वर्गे तस्मान्मद्दचनं कुरु ॥७८॥ पतिब्रतोवाच पत्युर्मे निधने ब्रह्मन् विधवालोकनिंदिता । कांस्तु लोकान्गमिष्यामि भम्नाचारा मलीमसा ॥७९॥ ब्रह्मोवाच अतस्ते नास्ति दोषो वै न मृतस्ते धवो धुना। अस्माकं वचनेनैव कुष्टी मन्मथतां व्रजेत् ॥८०॥ पड़े ॥६९॥ उसी समय ब्रह्माजी उस पतिव्रता से बोले । ब्रह्माजी ने कहा सम्पूर्ण देवताओं, ब्राह्मणों तथा गायों की मृत्यु हो जाय यह बात तुम्हें क्यों अच्छी लग रही है ? हे माँ ! तुम अपने क्रोध का परित्याग करो, सूर्योदय होने दो ॥७०-७१॥ पतिव्रता ने कहा-- हमारे लिए तो सभी लोकों से बड़े गुरु मेरे पति ही हैं, मुनि के शाप के कारण इनकी मृत्यु हो जायेगी ॥७२॥ इसीलिए मैने सूर्य को शाप दे दिया है, मैंने किसी क्रोध या मोह, या लोभ, या मत्सर के कारण सूर्य को शाप नहीं दिया है ॥७३॥ ब्रह्माजी ने कहा--- यदि किसी एक के मरने से त्रैलोक्य का कल्याण होता है तो हे मात: ! उससे तुमको अधिक पुण्य प्राप्त होगा ॥७४॥ सभी देवताओं के समक्ष उस पतिव्रता ने ब्रह्माजी से कहा पति को छोड़कर सैकड़ो प्रकार के कल्याण मुझे अच्छे नहीं लगते हैं ॥७५॥ ब्रह्माजी ने कहा-_ हे सौम्ये ! सूर्योदय हो जाने पर तथा तुम्हारे पति के भस्म हो जाने पर तथा त्रैलोक्य के सुखी हो जाने पर मैं तुम्हारा कल्याण करूँगा ॥७६॥ उस भस्म से जो पुरुष उत्पन्न होगा वह कामदेव के समान सुन्दर सभी गुणों से सम्पन्न तुम्हारा पति होगा और तुम रति के समान सदा के लिए हो जाओगी ॥७७॥ जैसे श्रीहरि देवताओं द्वारा पूजे जाते हैं, जैसे लक्ष्मीजी की पूजा होती है, उसी तरह तुम दोनों पति पत्नी मृत्यु के पश्चात् स्वर्ग में पूजे जाओगे, अतएव मेरी बात मानो ॥७८॥ पतित्रता ने कहा-- हे ब्रह्मन् ! पति के मर जाने पर तो मैं, लोक निन्दित विधवा हो जाऊंगी आचार के भङ्गरूप पाप से युक्त मैं किन लोको में जाऊंगी ॥७९॥ ब्रह्माजी ने कहा-- तुम्हें दोष नही लगेगा । तुम्हारा पति मरा नहीं है हमारे वरदान से यह कुष्ठी ही कामदेव के समान सुन्दर हो जायेगा ॥८०॥ श्रीभगवान् ने कहा-- ब्रह्माजी के ऐसा कहने पर पतित्रता ने क्षण भर विचार किया और कहा-__ ठीक है, उसके

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