Srishti Khanda Extracted Page 373
Padma Purana Sanskrit Hindi Part 1 (Chaukhamba Surbharati; extracted partial page blocks) · part-1 · Verse page-373
Sanskrit Original
देवतानां पितृणां च पुण्येहिसमुपस्थिते । गो भूहिरण्यधामानि प्रदेयानि च शक्तितः ॥१०७॥ यद्ब्रतं चोपदेक्ष्यामि तत्कुरुध्वं च सर्वशः। संसारोत्तारणयालमेतद्वेदविदो विदुः ॥१०८॥ यदा सूर्यदिने हस्तः पुष्यो वाथ पुनर्वसुः । भवेत्सवौंषधिस्नानं सम्यक् नारी समाचरेत् ॥१०९॥ तदा पचंशरात्मा तु हरिस्सन्निधिमेष्यति । अर्चयेत्पुंडरीकाक्षमनंगस्यानुकीर्तनेः ॥११०॥ कामाय पादौ संपूज्य जंघे वै मोहकरिणे । मेढ कदर्पनिधये कटिं प्रीतिमते नमः ॥११९॥ नाभिं सौख्यसमुद्राय वामनाय तथोदरम्। हदयं हृदयेशाय स्तनावाह्वादकारिणे ॥११२॥ उत्कंठायेति वै कण्ठमास्यमानंदकारिणे । वामांसं पुष्पचापाय पुष्पबाणाय दक्षिणम् ॥११३॥ मानसायेति वै मौलिं विलोलायेति मूर्ईजम् । सर्वात्मने शिरस्तद्ृद्देवदेवस्य पूजयेत्॥९१४॥ नमः शिवाय शांताय पाशांकुशधराय च । गदिने पीतवस्त्राय शंखचक्रधराय च ॥११५॥ नमो नारायणायेति कामदेवात्मने नमः । नमः शांत्यै नमः प्रीत्यै नमो रत्यै नमः श्रियै॥११६॥ नमः पुष्टयै नमस्तुष्ट्यै नमः सर्वार्थसंपदे। एवं संपूज्य गोविंदमनंगात्मकमीश्वरम् ॥११७॥ गंधमाल्यैस्तथा धूपै नेवेद्ये च भामिनी। तत आहूयधर्मज्ञं ब्राह्मणं वेदपारगम् ॥११८॥ अव्यंगमथ सम्पूज्य गंधपुष्पार्चनादिभिः। शालेयतंडुलप्रस्थं घृतपात्रेणसंयुतम् ॥१ ९९॥ अनुसार सौभाग्य भी प्राप्त होगा ॥१०५॥ जो कोई तुम लोगों के यहाँ धन लेकर तुमलोगों के यहाँ आये, उसके प्रति विना दम्भ तथा कपट के तुम लोगों को प्रेम करना चाहिए ॥१०६॥ जब देवताओं तथा पितरों की पुण्य तिथि आये उस दिन तुम लोगों को गौ, पृथिवी, सुवर्ण तथा अन्न का अपनी शक्ति के अनुसार दान करना चाहिए ॥१०७॥ में जिस व्रत को बतलाता हूँ उसका नियम पूर्वक पालन करो । वेदज्ञों का कहना है कि यह ब्रत संसार सागर से पार करने में समर्थ है ।।१०८॥ जब रविवार के दिन, हस्त या पुष्य या पुनर्वसु नक्षत्र आये उस दिन नारी को अच्छी तरह से सर्वोषिधि से स्नान करना चाहिए ॥१०९॥ उस दिन अपने मन में ऐसी भावना करे कि आज मेरे काम शरीरक श्रीमगवन् हमारे पास आयेंगे । उसके बाद काम के नामों से भगवान् पुण्डरीकाक्ष की पूजा करे ॥११०॥ कामाय नमः इस मंत्र से पैरों की पूजा करके, मोहकारिणे नमः इस मंत्र से दोनों जंघाओं की पूजा करे, कंदर्पनिधये नमः इस मन्त्र से मेढ़ (अण्डकोश) की पूजा करे प्रीतिमते नमः इस मंत्र से कमर की पूजा करे।। ११ १॥ सौख्यसमुद्राय नमः इस मंत्र से नाभि की पूजा करे, वामनाय नमः इस मंत्र से उदर की पूजा करे हृदयेशाय नमः इस मंत्र से हदय की पूजा करे, आह्वादकारिणे नमः इस मंत्र से दोनों स्तनों की पूजा करे।। ११२।। उत्कण्ठाय नमः इस मन्त्र से कण्ठ की पूजा करे, आनन्दकारिणे नमः उस मन्त्र से मुख की पूजा करे, पुष्पचापाय नमः इस मन्त्र से बायें कंधे की पूजा करे पुण्यबाणाय नमः इस मंत्र से दाहिने कन्थे की पूजा करे ।।११३।। मानसाय नमः -इस मन्त्र से शिर की पूजा करे, विलोकाय नमः इस मन्त्र से बालों की पूजा करे सर्वात्मने नम: इस मन्त्र से शिर की पूजा करे और देवदेवाय नमः इस मन्त्र से मुख की पूजा करे ॥११४॥ इसके बाद में हाथ जोड़कर प्रार्थना करे शिवाय नमः, शान्ताय नमः, पाशाङ्कुशधराय नमः, गदिने नमः, पीतवाससे नमः, शङ्खचक्रधराय नमः ॥११५॥ नारायणाय नमः, कामदेवात्मने नमः, शान्त्यै नमः, प्रीत्यै नम;, रत्यै नमः, श्रियै नमः ॥११६॥ पुष्ट्यैः नमः, तुष्ट्यै नमः, सर्वार्थ सम्पदे नमः इसतरह से कामात्मक श्रीगोविन्द की पूजा करे ॥११७।। उसके बाद चन्दन, माला, धूप तथा नेवेद्य से श्रीभगवान् की पूजा करे । उसके बाद धर्मज्ञ तथा वेद पारंगत ब्राह्मण को बुलाकर ॥११८॥ पुष्प तथा चन्दन आदि से उनकी पूजा करनी चाहिए । ब्राह्मण को अव्यङ्ग
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