Srishti Khanda Extracted Page 372

Padma Purana Sanskrit Hindi Part 1 (Chaukhamba Surbharati; extracted partial page blocks) · part-1 · Verse page-372

padma-puranasrishti-khandacreation-cosmologypartialpage-extract

Sanskrit Original

वेश्यानामपि योधर्मस्तं नो ब्रूहि तपोधन । कथयिष्येऽवदत्तासां यद्दालभ्यश्चैकितायनः ॥९३॥ दाल्भ्य उवाच जलक्रडाविहारेषु पुरा सरसि मानसे। भवतीनां सगर्वाणां नारदोभ्याशमागतः॥९४॥ हृताशनसुताः सर्वा भवत्योप्सरसः पुरा । अप्रणम्यावलेपेन परिपृष्टः सयोगवित् ॥९५॥ कथं नारायणोस्माकं भर्त्ता स्यादित्युपादिश । तस्माद्वरप्रदानं च शापश्चायमभूत्पुरा॥९६॥ शय्याद्दयप्रदानेन मधुमाधवमासयोः । सुवर्णोपस्करोत्संगं द्वादश्यां शुक्लपक्षतः ॥९७॥ भर्ता नारायणो नूनं भविष्यत्यन्यजन्मनि । यदकृत्वा प्रणामं मे रूपसौभाग्यमत्सरात् ॥९८॥ परिपृष्टोस्मि तेनाशु वियोगो वो भविष्यति । चोरैरपहृताः सर्वा वेश्यात्वं समवाप्स्यथ ॥९९॥ एवं नारदशापेन केशवस्य च शापतः । वेश्यात्वमागताः सर्वा भवत्यः काममोहिताः ॥१००॥ इदानीमपि यद्दक्ष्ये तच्छृणुध्वं वरांगनाः । पुरा दैवासुरे युद्धे हतेषु शतशः सुरैः॥९०९॥ दानवासुरदैत्येषु राक्षसेषु ततस्ततः । तेषां दारसाहस्राणि शतशोऽथ सहस्रशः ॥१०२॥ परिणीतानि यानि स्यु ् वलाद्भुक्तानि यानि वै तानि सर्वाणि देवेशः प्रोवाच वदतांवरः ॥९०३॥ वेश्याधर्मेण वर्तध्वमधुना तृपमंदिरे। भक्तिमत्यो वरारोहास्तथा देवकुलेषु च॥९०४॥ राजतः स्वामिनश्चापि जीविकां च प्रलप्स्यथ । भविष्यति च सौभाग्यं सर्वासामपि शक्तितः ॥१०५॥ य:कश्चिच्छुल्कमादाय गृहमेष्यति वः सदा। निश्छद्मानैवोपचर्यः प्रीतिभावैरदांभिकैः ॥१०६॥ किया है । हमलोग अपने धर्म से पतित हो गयी हैं; इस समय केवल आप ही हमलोगों का सहारा हैं ॥९२॥ बुद्धिमान् केशव ने हमलोगों को आपके विषय में निर्देश दिया है । अतएव आप बतलायें कि श्रीभगवान् का संयोग प्राप्त करके हमलोग वेश्या क्यों हो गयीं ॥९३॥ हे तपोधन ! हमलोगों को वेश्या के धर्म को बतलायें । यह सुनकर चेकितायन दाल्भ्य ऋषि ने कहा कि मैं तुमलोगों को बतलाता हूँ ॥९४॥ दाल्भ्य महर्षि ने कहा-- पूर्वजन्म में तुम लोग अग्नि की पुत्रियाँ अप्सरा थी । एक बार तुम लोग मानसरोवर में जलक्रीडा कर रही थी, उसी समय तुम लोगों के सन्निकट नारद ऋषि आये; किन्तु गर्वीली होने के कारण तुमलोगों ने उनको प्रणाम नहीं किया । तुमलोगों ने उन महर्षि से पूछा ॥९४-९५।। आप हमें बतलायें कि किस उपाय को करने से हमलोगों के पति भगवान् नारायण होयेंगे? उस समय नारदजी ने तुमलोगों को वरदान और शाप दोनों दिया ॥९६॥ उन्होंने कहा-- चेत्र और वैशाख इन दोनों महीनों के शुल्लपक्ष की द्वादशी तिथि को, सुवर्ण की सामग्री से युक्त दो शय्याओं का दान करने से ॥९७॥ दूसरे जन्म में भगवान् नारायण तुमलोगों के पति होंगे इसमें कोई सन्देह नहीं है । किन्तु अपने रूप तथा सौभाग्य के अभिमान के कारण तुमलोगों ने जो मुझे प्रणाम किए बिना ही ॥९८॥ पूछा है, उसके कारण तुमलोगों से उनका शीघ्र ही वियोग भी हो जायेगा । तुमलोगों का अपहरण चोर कर लेंगे और तुमलोग वेश्या हो जाओगी ॥९९॥ इस तरह नारदजी के शाप के कारण तथा भगवान् केशव के शाप के कारण, काममोहित तुमलोग वेश्या हो गयी हो॥१००॥ हे वराङ्गनाओं ! इस समय भी मैं जो कह रहा हूँ उसे तुमलोग सुनो ।प्राचीनकाल में जब देवासुर संग्राम में देवताओं द्वारा सैकड़ो असुर, दानव, दैत्य तथा राक्षस मारे गये । उन सबों की सैकड़ो हजार पत्नियाँ ॥१०२॥ जो विवाहिता थी उन सबों का देवताओं ने बलपूर्वक उपभोग किया । उन सबों को बोलने वालों में श्रेष्ठ इन्द्र ने कहा॥ १० ३॥ हे सुन्दरियों । तुमलोग भक्तिपूर्वक इस समय राजा के भवन में तथा मन्दिर में वेश्या धर्म से निवास करो ॥१०४॥ तुम लोगों को राजाओं तथा स्वामियों से जीविका की प्राप्ति होगी । तुम सबों को शक्ति के !

No translation available yet.

Spotted a mistake or have a question? Sign in to let us know