Srishti Khanda Extracted Page 328

Padma Purana Sanskrit Hindi Part 1 (Chaukhamba Surbharati; extracted partial page blocks) · part-1 · Verse page-328

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Sanskrit Original

SSS सृष्टिखण्ड ३०३ कंदर्पाय नमो गुह्यं माधवाय नमः कटिम् । दामोदरायेत्युदरं पाश्वे च विपुलाय वै ॥२८॥ नाभि च पद्ानाभाय हदयं मन्मथाय वै। श्रीधराय विभोर्वक्षः करौ मधुभिदे नमः ॥२९॥ वैकुण्ठाय नमः कंठमास्यं पद्मुखाय वै। नासामशोकनिधये वासुदेवाय चाक्षिणी ॥३०॥ ललाटं वामनायेति हरये च पुनर्भ्रुवौ । अलकं माधवायेति किरीटं विश्वरूपिणे ॥३१॥ नमः सर्वात्मने तद्ूच्छिर इत्यभिपूजयेत् । एवं संपूज्य गोविदं धूपमाल्यानुलेपनैः॥३२॥ ततस्तु मंडलं कृत्वा स्थंडिलं कारयेन्मृदा। चतुरस्त्रं समंताच्च रत्मिमात्रमुदकप्लवम्॥३३॥ श्लक्ष्णं हृद्यं च परितो वप्रत्रयसमावृतम् । त्रिरंगुलोच्छितावप्रास्तद्विस्तारो द्विरंगुलः ॥३४॥ स्थंडिलस्योपरिष्टात्तु भित्तिरष्टांगुला भवेत् । नदीबालुकया सूर्ये लक्ष्म्याः प्रतिकृतिं न्यसेत् ॥३५॥ स्थंडिले सूर्यमध्यस्थ लक्ष्मीमभ्यर्चयेट्टधः। नामो देव्यै नमः शांत्यै नमो लक्ष्म्यै नमः श्रियै॥३६॥ नमस्तुष्ट्यै नमः पुष्ट्यै सृष्ट्यै दृष्ट्ये नमोनमः । विशोका दुःखनाशाय विशोका वरदास्तु ते ॥३७॥ विशोका मेस्तु संपत््यै विशोका सर्वसिद्धये। ततः शुभ्रांबरैः सूर्य वेष्ट्य संपूजयेत्फलैः ॥३८॥ ् क्ष्यैर्नानाविधैस्तद्ठत्सुवर्णकमलेन च । राजतीषु च पात्रीषु न्यसेदर्भोद्क बुधः ॥३९॥ ततस्तु नृत्यगीतानि कारयेत्सकलां निशाम्। यामत्रये व्यतीते तु तत उत्थाय मानवः ॥४०॥ करे ॥२७॥ कन्दर्पाय नमः गुह्यां पूजयामि इस मन्त्र से गुप्ताङ्गों की पूजा करे । माधवाय नमः कटिं पूजयामि इस मन्त्र से श्रीभगवान् के कमर की पूजा करे । दामोदराय नमः उदरं पूजयामि इस मन्त्र से उदर की पूजा करे, विपुलाय नमः पार्श्वे पूजयामि इस मन्त्र से दोनों पार्श्चभागों की पूजा करे ॥२८॥ पद्मनाभाय नमः नाभिं पूजयामि इस मन्त्र से नाभि की पूजा करे, मन्मथाय नमः हृदयं पूजयामि, इस मन्त्र से हदय की पूजाकरे, श्रीधराय नमः वक्षः पूजयामि इस मन्त्र से वक्षःस्थल की पूजा करे, मधुसूदनाय नमः करौ पूजयामि, इस मन्त्र से दोनों हाथों की पूजा करे ॥२९॥ वैकुण्ठाय नमः कण्ठे पूजयामि इससे कण्ठ की पूजा करे, पद्ममुखाय नमः मुखं पूजयामि इस मन्त्र से मुख की पूजा करे । अशोकनिधये नमः नासे पूजयामि इस मन्त्र से नाक की पूजा करे, वासुदेवाय नमः अक्षिणी पूजयामि इस मन्त्र से दोनों नेत्रों की पूजा करे ॥३०॥ वामनाय नमः ललाटं पूजयामि इस मन्त्र से ललाट की पूजा करे, हरये नमः श्रुवौ पूजयामि इस मन्त्र से भृकुटियों की पूजा करे, माधवाय नम: अलकं पूजयामि इस मन्त्र से केशों की पूजा करे, विश्वरूपिणे नमः किरीटं पूजयामि इस मन्त्र से किरीट की पूजा करे॥३१॥ सर्वात्मने नमः शिरः पूजयामि इस मन्त्र से शिर की पूजा करे । इस तरह से श्रीभगवान् की पूजा करके धूप, माला तथा चन्दन से उनकी पूजा करे ॥३२॥ उसके बाद गण्डल बनाकर उसके ऊपर मिट्टी की वेदी बनाये। उसे चारो आरे से चतुरस्र (वर्गाकार) होना चाहिए । उसके बाद एक हाथ की खाई बनायें ।।३३। उसको चिकने तथा सुन्दर तीन वप्रों (चाहारदिवारियों से घेर दे) चाहारदिवारियों को तीन अङ्गुल ऊँचा बनाये और उसका विस्तार दो अङ्गुल होना चाहिए ॥३४॥ स्थण्डिल के ऊपर की दिवार आठ अङ्गुल की हो नदी के बालू से लक्ष्मी की मूर्ति को बनाकर धूप में रखे ॥३५॥ स्थण्डिल पर सूर्य के बीच में लक्ष्मी की पूजा करे । लक्ष्मीजी की पूजा देव्यै नमः, शान्त्यै नमः, लक्ष्म्यै नमः ।।३६।। श्रियै नमः, तुष्टयै नमः, पुष्टयै नमः, सृष्ट्यै नमः, दृश्यै नमः इन मन्त्रों से करे फिर प्रार्थना करे । यह विशोक द्वादशी मेरे लिए दुखों का नाश करने वाली, वरदान देने वाली, सम्पत्ति प्रदान करे वाली तथा सभी कामनाओं की पूर्ति करने वाली हो । उसके बाद श्वेत वस्र में लपेट कर सूर्य की फलों से पूजा करे ॥३७-३८॥ अनेक प्रकार के पकवानों से तथा सुवर्णनिर्मित कमलों से पूजा करे । विद्वान् को चाहिए कि वह

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