Srishti Khanda Extracted Page 100
Padma Purana Sanskrit Hindi Part 1 (Chaukhamba Surbharati; extracted partial page blocks) · part-1 · Verse page-100
Sanskrit Original
योगिनी योगमाता च तपश्चक्रे सुदारुणम् । प्रसन्नोभगवांस्तस्या वरं वव्रे तु साततः ॥३७॥ योगवंतं सुरूपं च भर्तारं विजितेन्द्रियम्। देहि देव प्रसन्नस्त्वं यदि ते वदतांवर ॥३८॥ उवाच देवो भविता व्यासपुत्रो यदा शुकः । भवित्री तस्य भार्या त्वं योगाचार्यस्य सुव्रता ॥३९॥ भ्रविष्यति च ते कन्या कृत्ती नामाथयोगिनी। पांचालपतये देया सात्वताय तु सा तदा॥४०॥ जननी ब्रह्मदत्तस्य योगसिद्धांतगा स्मृता । कृष्ण्गौरश्च शंभुश्च भविष्यंति च ते सुताः॥४९॥ सर्वकामसमृद्धेषु विमानेष्वपि पावनाः । कि पुनः श्राद्धदा विप्रा भक्तिमंतः क्रियान्विता:॥४ २॥ गौर्नाम कन्या येषां तु मानसी दिवि राजते । सुकन्या दयिता पत्नी साध्यानां कीर्तिवरद्धिनी ॥४३॥ मरीचिगर्भनामानो लोके मार्तडमंडले। पितरो यत्र तिष्ठंति हविष्मंतोऽगिरः सुताः ॥४४॥ तीर्थश्राद्धप्रदा यांति यत्र क्षत्रियसत्तमाः। राज्ञां तु पितरस्ते वै स्वर्गभोगफलप्रदाः॥४५॥ एतेषां मानसी कन्या यशोदा नाम विश्रुता । पत्नीयांशुमतः श्रेष्ठा स्नुषा पंचजनस्य च ॥४६॥ जनन्यथ दिलीपस्य भगीरथपितामही। लोकाः कामदुघा नाम कामभोगफलप्रदाः ॥४७॥ सुस्वधानाम पितरो यत्र तिष्ठंति ते सुताः। आज्यपा नामलोकेषु कर्दमस्य प्रजापतेः ॥४८॥ पुलहाग्रजदायादा वैश्या सन्भावयंति ह । यत्र श्राद्धकृतः सर्वे पश्यंति युगपद्रताः ॥४९॥ मातृश्रातृपितृस्वसृः सखिसंबन्धिबांधवान् । अपिजन्मायुतै्दष्टाननुभूतान्सहस्रशः ॥५०॥ एतेषां मानसी कन्या विरजा नाम विश्रुता। सा पत्नी नहुषस्यासीद्ययातेर्जननी तथा ॥५९॥ बल से युक्त मेरे (पुलस्त्य महर्षि के) सैकड़ों पुत्र हैं ॥३५॥ वे महाभाग महात्मा भक्तों को अभय बना देने वाले हैं। सुना जाता है कि इन सबों की मानसी कन्या पीवरी स्वर्ग लोक में विद्यमान है ॥३६॥ वह योगिनी तथा योगमाता है। उसने कठोर तपस्या की । उससे प्रसन्न होकर ब्रह्माजी ने उससे वर माँगने के लिए कहा तो उसने कहा ॥३७॥ हे वर देने वालों में श्रेष्ठ देव ! आप यदि प्रसन्न हैं तो मुझे, योगयुक्त, सुन्दर रूप वाले तथा जितेन्द्रिय पति प्रदान करें॥३८॥ ब्रह्माजी ने कहा कि जब व्यासजी के पुत्र शुकदेव जी होंगे तो उन योगाचार्य की तुम सुव्रता पत्नी होओगी। तुम्हारी कन्या कृती भी योगिनी होगी । उस समय तुम उसका पाझालराज से विवाह करना ॥४०॥ योग के सिद्धान्त में पारङ्गत वह ब्रह्मदत्त की माँ बनेगी । तुम्हारे भी तीन पुत्र होंगे कृष्ण, गौर और शम्भु ॥४१॥ सभी कामनाओं से समृद्ध विमानों में भी पवित्र बनाने वाले होते हैं । जो श्राद्ध करने वाले भक्ति सम्पन्न तथा क्रियावान् विप्र होते हैं उनके विषय में क्या कहना है 2॥४२॥ पितरों की मानसी कन्या जो गौ है वह सुकन्या अपने पति साध्यगणों की प्रियतमा पत्नी तथा उनकी कीर्ति को बढाने वाली है ॥४३॥ मार्तण्ड मण्डल नामक मरीचि गर्भ पितरों के लोक में, जहाँ पर अङ्गिरा ऋषि के पुत्र हविष्मान् पितृगण रहते हें । वे राजाओं के पितर हैं तथा भोगमोक्ष प्रदान करने वाले हैं। उस लोक में तीर्थश्राद्ध करने वाले श्रेष्ठ क्षत्रिय जाते हैं ॥४४-४५।। इन पितरों की मानसी कन्या यशोदा नाम से विख्यात हैं, वह अंशुमान की पत्नी तथा पञ्चजन की पुत्रबधू है ॥४६॥ वह दिलीप की माता तथा भगीरथ की पितामही है । कामदुघ नामक जो लोक हैं काम तथा भोग प्रदान करने वाले हैं ॥४७॥ वहाँ सुस्वधा नामक पितरों का निवास है । वे कर्दम प्रजापति के पुत्र हैं तथा लोक में आज्यप नाम से विख्यात हैं ॥४८॥ पुलह के बड़े भाई से उत्पन्न वैश्यगण उनकी पूजा करते हैं । यज्ञ तथा श्राद्ध करने वाले वैश्य उसी लोक में जाते हैं ॥४९॥ वे एक ही समय में वहाँ अपने उन माता, भाई, पिता, सासु, मित्र तथा सम्बन्धी इत्यादि सहस््रों बान्धवों का दर्शन करते हैं जिनका वे अपने दशो हजार जन्मों में अनुभव तथा दर्शन किए रहते हैं ॥५०॥ इन सबों की मानसी कन्या विरजा
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